ये सोचता हूँ चिरागों का एहतमाम करूँ।
हवा को भूख लगी है कुछ इंतेज़ाम करूँ।
हरेक साँस रगड़ खा रही है सीने में।
और आप कहते हैं आहों पे और काम करूँ।
======================
ये इश्क़ एक जुआ है बताओ!! खेलोगे
समझ लो दांव पे सब कुछ लगाना पड़ता है।
======================
कैलेंडर भी कहा तक खस्ताहाली को छुपाएंगे
नयी जगह से रोज पलस्तर टूट जाता है
======================
हर आदमी से तबीयत तो मिल नहीं सकती
मगर ये हाथ तो फिर भी मिलाना पड़ता है
======================
थोड़ा सा बदज़बान हूँ मैं इत्तेफ़ाक़ से
अब क्या करूँ पठान हूँ मैं इत्तेफ़ाक़ से
इज़हार इ इश्क़ तुमने जरा देर से किया
अब तो किसी की जान हूँ मैं
======================
दिन गए अब ये हिमाकत कौन करता है
वो क्या कहते हैं उसको
मोहबत
अब कौन करता है
कोई गम से परेशां है कोई जन्नत का तालिब है
गरत सजदे कराती है इबादत कौन करता हिअ
======================
कलेण्डर भी कहा तक खस्ताहाली को छुपायेंगे
नयी जगहों से रोज़ाना पलस्तर टूट जाता है
मेरा दुश्मन परेशां है मेरी माँ की दुआओं से
वो जब भी वार करता है तो खंजर टूट जाता है
======================
हर अँधेरा रौशनी में लग गया
जिसको देखो शायरी में लग गया
हमको मर जाने की फुर्सत कब मिली
वक़्त सारा जिंदगी में लग गया
अपना मैखाना बना सकते थे हम
इतना पैसा महकशी में लग गया
शायरी ने खून थुकवाया हमें
जो बचा वो आशिक़ी में लग गया
======================
अपने मैयार से नीचे तो मैं आने से रहा
शेर भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा
कर सको तो मेरी चाहत का यकीन कर लेना
अब तुम्हे चीर के दिल दिखने से रहा
======================
वस्ल की दौलत मिली है खो मत
जानेमन तुम सो रही हो सो मत
ये तो मेरी दस्ताने हिज्र है
यार तुम क्यों रो रही हो रो मत
======================
ऐसे हालत से मजबूर बशर देखे हैं
असल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं
हमने देखा है वजलदार घरानो का ज़वाल
हमने सड़कों पर कई शाह ज़फर देखे हैं।
======================
जितनी भी की थी उतनी मोहब्बत नहीं मिली
क्या फायदे को रोईए लगत नहीं मिली
क़ातिल हमारे कतल से मशहूर हो गया
हमको शहीद हो के भी शोहरत नहीं मिली
======================
वो चाहते हैं की हिंदुस्तान छोड़ दें हम
बताओ भूत के डर से मकान छोड़ दें हम
अब इस मकाम पे हाथों के अबले देखें हैं
पहाड़ काट लिया है चटान छोड़ दें हम
======================
इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएं
हम तेरे सर की कसम झूट ही खाने लग जाएं
इतने सन्नाटे पीये मेरी समात ने की अब
सिर्फ आवाज पे चहुँ तो निशाने लग जाएं
मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ किस्से
ये जो लौंडे हैं मेरे पांव दबाने लग जाएं
हवा को भूख लगी है कुछ इंतेज़ाम करूँ।
हरेक साँस रगड़ खा रही है सीने में।
और आप कहते हैं आहों पे और काम करूँ।
======================
ये इश्क़ एक जुआ है बताओ!! खेलोगे
समझ लो दांव पे सब कुछ लगाना पड़ता है।
======================
कैलेंडर भी कहा तक खस्ताहाली को छुपाएंगे
नयी जगह से रोज पलस्तर टूट जाता है
======================
हर आदमी से तबीयत तो मिल नहीं सकती
मगर ये हाथ तो फिर भी मिलाना पड़ता है
======================
थोड़ा सा बदज़बान हूँ मैं इत्तेफ़ाक़ से
अब क्या करूँ पठान हूँ मैं इत्तेफ़ाक़ से
इज़हार इ इश्क़ तुमने जरा देर से किया
अब तो किसी की जान हूँ मैं
======================
दिन गए अब ये हिमाकत कौन करता है
वो क्या कहते हैं उसको
मोहबत
अब कौन करता है
कोई गम से परेशां है कोई जन्नत का तालिब है
गरत सजदे कराती है इबादत कौन करता हिअ
======================
कलेण्डर भी कहा तक खस्ताहाली को छुपायेंगे
नयी जगहों से रोज़ाना पलस्तर टूट जाता है
मेरा दुश्मन परेशां है मेरी माँ की दुआओं से
वो जब भी वार करता है तो खंजर टूट जाता है
======================
हर अँधेरा रौशनी में लग गया
जिसको देखो शायरी में लग गया
हमको मर जाने की फुर्सत कब मिली
वक़्त सारा जिंदगी में लग गया
अपना मैखाना बना सकते थे हम
इतना पैसा महकशी में लग गया
शायरी ने खून थुकवाया हमें
जो बचा वो आशिक़ी में लग गया
======================
अपने मैयार से नीचे तो मैं आने से रहा
शेर भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा
कर सको तो मेरी चाहत का यकीन कर लेना
अब तुम्हे चीर के दिल दिखने से रहा
======================
वस्ल की दौलत मिली है खो मत
जानेमन तुम सो रही हो सो मत
ये तो मेरी दस्ताने हिज्र है
यार तुम क्यों रो रही हो रो मत
======================
ऐसे हालत से मजबूर बशर देखे हैं
असल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं
हमने देखा है वजलदार घरानो का ज़वाल
हमने सड़कों पर कई शाह ज़फर देखे हैं।
======================
जितनी भी की थी उतनी मोहब्बत नहीं मिली
क्या फायदे को रोईए लगत नहीं मिली
क़ातिल हमारे कतल से मशहूर हो गया
हमको शहीद हो के भी शोहरत नहीं मिली
======================
वो चाहते हैं की हिंदुस्तान छोड़ दें हम
बताओ भूत के डर से मकान छोड़ दें हम
अब इस मकाम पे हाथों के अबले देखें हैं
पहाड़ काट लिया है चटान छोड़ दें हम
======================
इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएं
हम तेरे सर की कसम झूट ही खाने लग जाएं
इतने सन्नाटे पीये मेरी समात ने की अब
सिर्फ आवाज पे चहुँ तो निशाने लग जाएं
मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ किस्से
ये जो लौंडे हैं मेरे पांव दबाने लग जाएं

0 Comments